Wednesday, 22 July 2015

एक मानव

एक मानव
एक पत्थर
एक हीरा
कोयले की खान
एक मोती
अमृत सागर के गर्भ की ज्योति
एक तारा
नीला आसमान
स्थिर
भक्त ध्रुव
कण कण मे कृपानिधान
मानव हैवान
गगन का सुर्य
जीवन की पहचान
गगन का चाँद
अमृत की खान
प्रियतम की जान
खुला आसमान
जिसने रचा ये जहाँ
साक्षात भगवान
नव सृजन
नित विनाश
जीवन की आस
प्रेम विश्वास
धर्म कर्म
रिश्ते नाते
धोरा
तेरा मेरा
मिल जाये तो मौका
जीवन की आस
परमात्मा मे विश्वास ।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव