तूझे नजर भरके इन्द्र ने जब देखा ।
इन्द्र का इमान धर्म भी डगमगाया।
नजरों से जब नझरे मिली करार दिल को उसके आया।
सारी दुनिया खोज ली उसने जब कही ना तुझको पाया।
भागते भागते अमृत सागर तक आया।
दोनों हाथ विनय से जोड़कर गिडगिया।
क्या आपने इन्हें कही देखा है।
कृतक ने पता अमृत सागर का उसे बताया ।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 22 July 2015
नझरो भरके तुमहे इन्द्र ने
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