हार ना ही कभी मानी है
और कभी नही मानुँगा
दिल मे जो ठानी है
वही करता जाउँगा
अपनी डगर पे चलते चलते
मंजिल मैंने पानी है
अंजान डगर
सुनसान डगर
कटीली और पथरीली डगर
राह कृतक रोक ना पायेगी
मंजिल खुद ब खुद आकर
कदमों पे नतमस्तक हो जायेगी
झुम उठेगी फिजा
कायनात खुशगवार हो जायेगी
मेरी फतेह के नग्मे सुनकर
इन्द्र धनुषी स्वर लहरी
अपना रूतबा दिखायेगी
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 2 July 2015
महत्वाकाँक्षा
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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