कलयुगी दुशयंत
संगेमरमरी हूर को देख दुशयंत भी ललचाया है
वासना ग्रसित प्रेम मन मे उमड़ आया है
तुमने हमें कैसे भुलाया शकुंतला
क्या तुम्हे मेरा ख्याल नही आया है
हमारे बीच समय कहाँ से आया
कयो हमारी मोहब्बत को तुमने भुलाया
कयो पीछा हमसे छुड़ाया
तुमसा हँसी
रब दी कायनात मे
हमने ना पाया
बेचेन दिल तेरी मोहब्बत का करार आया
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