Thursday, 9 July 2015

शब्दो का एक झोका हवा के साथ के साथ आता। केनवास पे आके नित नव मृदुल आकृतियाँ बनाता है किसी नग्मा ए मोहब्बत जान पड़ता है। कोई "नाम" की मशहूर गझल समझ के गुनगुनाता है कृतक मनोहर का साहित्य से सदियों से नाता है। खाबो और ख्यालो मे भी साहित्य सरिता मे गोते लगाता है।

शब्दो का एक झोका हवा के साथ के साथ आता।
केनवास पे आके नित नव मृदुल आकृतियाँ बनाता है
किसी नग्मा ए मोहब्बत जान पड़ता है।
कोई "नाम" की मशहूर गझल समझ के गुनगुनाता है
कृतक मनोहर का साहित्य से सदियों से नाता है।
खाबो और ख्यालो मे भी साहित्य सरिता मे गोते लगाता है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव