नजाकत हुस्न का जेवर है
हुस्ने यार निखर के आता है।
महबुबे मोहब्बत को जलवा दिखाता है
नजाकत महबुबे मोहब्बत को फँसाता है।
महबुबा की नजाकत का हुनर काम आता है।
आशिक महबुबे मोहब्बत के आगे शर अपना झुकाता है।
मोहब्बत का हुनर महबुबे मोहब्बत को आता है।
हुस्न इष्क को उँगलियो पर नचाता है।
No comments:
Post a Comment