Tuesday, 28 July 2015

सागर की मादक लहरों मे

सागर की मादक लहरों मे मेरी नाँव डगमगाने लगी है।
दिल को यु लगता है घड़ी महबुबे मोहब्बत से मुलाकात की आहिस्ता आहिस्ता करीब आने लगी है।

मेरी मधुशाला के कृतक अंजान डगर को गुमाँ होने लगा है।
महबुबे मोहब्बत के इष्क मे नादान दिल आहिस्ता आहिस्ता खोने लगा है।

महबुबे मोहब्बत की आँखों मे सैलाभे अश्क आया है।
इस सैलाभे अश्क मे कृतक अंजान डगर ने दोनों पतवार गँवाई है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव