जिन्दगी हरेक पल तुझसे बहुत दूर जा रहा हूँ मै।
अपनी महबुबा मोहब्बत मौत को फकत दिल के करीब पा रहा हू मै।
आहिस्ता आहिस्ता अहसासे मोहब्बत होने लगा है।
नादान दिल महबुबे मोहब्बत के इष्क मे आहिस्ता आहिस्ता खोने लगा।
सागर की मादक लहरों मे मेरी नाँव डगमगाने लगी है।
दिल को यु लगता है घड़ी महबुबे मोहब्बत से मुलाकात की आहिस्ता आहिस्ता करीब आने लगी है।
मेरी मधुशाला के कृतक अंजान डगर को गुमाँ होने लगा है।
महबुबे मोहब्बत के इष्क मे नादान दिल आहिस्ता आहिस्ता खोने लगा है।
महबुबे मोहब्बत की आँखों मे सैलाभे अश्क आया है।
इस सैलाभे अश्क मे कृतक अंजान डगर ने दोनों पतवार गँवाई है।
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