Sunday, 26 July 2015

बहुत खुबसूरत

बहुत खुबसूरत
और बहुत प्यारी हो
जमाने की रूसवाइयो से
अंजान
होन
वाली
दोस्त
हमारी हो
अजीज
दिल को लगती
छलकती
मोहब्बत
नही
लाचारी हो
बहुत
खुबसूरत
रब की रचना
अनमोल
कृति
संगीता
दोस्त
हमारी हो
कृतक
ने
देखते ही
पहली नजर मे
जान लिया
फकत
दिल
ने अपना यार
मान लिया

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव