Sunday, 26 July 2015

राम और अली जैसे मिश्री की डेली।

रमजान की शुरुआत राम के नाम से होती है।
दीपावली की सुब अली के साथ होती है।

ये समझने की चीज हिन्दू तो जानते है।
मुस्लिम भाइयों को ये सच मानना होगा।

मानवता के शत्रुओ को पहचानना होगा।
आदमी यत को दिल से फकत मानना होगा।

दिलों मे नेर ए मोहब्बत लेके धर्म के भेद को जानना होता ।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव