Thursday, 9 July 2015

तेरे चेहरे के नूर ने " ए नूरे नजर " दिवाना हमें बनाया है। दानवो की बात छोड़ ऋषि मुनियों और देवो का ईमान भी डगमगाया है। ए हुस्न परी ए जाने जहाँ कही देवराज इन्द्र ने तो तूम्हे नही पठाया है। तेरे चेहरे की रंगत देख इमान कृतक अंजान मनोहर का भी डगमगाया है।

तेरे चेहरे के नूर ने " ए नूरे नजर " दिवाना हमें बनाया है।
दानवो की बात छोड़ ऋषि मुनियों और देवो का ईमान भी डगमगाया है।
ए हुस्न परी ए जाने जहाँ कही देवराज इन्द्र ने तो तूम्हे नही पठाया है।
तेरे चेहरे की रंगत देख इमान कृतक अंजान मनोहर का भी डगमगाया है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव