उनकी रूसवाइयो से दो चार हम हुये
इतने हुये करीब
इतने हुये करीब
कि उनकी झुल्फो मे
गिरफ्तार हम हुये
गिरफ्तार हम हुये
जब दिल से जुदा हुये
जब दिल से जुदा हुये
तलबगार हम हुये
तलबगार हम हुये
महबुबे मोहब्बत के इष्क मे
महबुबे मोहब्बत कै इष्क मे
जानशी यार हम हुये।
लक्ष्मी जी aabhar
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