मेरी रचनाओं को अमृत सागर मे
मेरे यारो का इन्तझार आज भी है
तेरी टीका टिप्पणियों से दो चार हो जाने को
यारो का दिल बेकरार आज भी है
साज कुदरत ने छेड़ दी है
सावन का महिना बहुत सुहाना है
महबुबे मोहब्बत ने नग्मात ए मोहब्बत गुनगुना है
आरजु ए वफा को तहेदिल से शुक्रिया फरमाना है
जुस्तजु ए महबुब को आरजु बनाना है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 29 August 2015
मेरी रचना
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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