Thursday, 6 August 2015

जिन्दगी

जिन्दगी
आज
जी का जंजाल बन गई है
फटी हुई धोती नही
फटी हुई लंगोटी नही
फटा हुआ रूमाल बन गई है
झुग्गीयो से झाँकते हुये
जिन्दगी को निहारा मैंने
सड़क पे सरेआम
हाथ फैलाय
जिन्दगी को पुकारा मैंने
फकत पापी पेट के लिये
जिन्दगीयो को बिकते हुये
पाया
उस सुनसान सड़क पे
जिन्दगी ने आवाज आवाज लगाई
है कोई माई का लाल
जो आज मुझे सरेआम निलामी से बचायेगा
कोठे से उठाकर गले से लगायेगा
जिन्दगी ने भुले से कलयुग मे आवाज लगाई
वाहनों की आविजाही ओर जमाने के
शोरगुल मे दब गई भाई
नेता अभिनेता
सभी ने जिन्दगी को
ढाढस बँधाया
वादे के मुताबिक
कोई काम ना आया
आज फिर जिन्दगी निलाम हो गई
कोठे की फकत गुलाम हो गई
मानवता राह बदल के भीड़ मे खो गई
आज फिर जिन्दगी सरेआम हो गई

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