Thursday, 6 August 2015

अमृत सागर मंथन

सुर और अशुरो ने मिलकर
सागर मंथन का प्लान बनाया
सुमेरू पर्वत को राई
और शेषनाग को डोर बनाया ।
सोलह रत्न मिले सागर से
कश्यप बने श्री हरि ने
लक्ष्मी को पाया।
मोहिनी रूप धर श्री हरि ने
अमृत देवो को
और
मादक
हाला
अशुरो
को पिलाई
छद्म रूप धर राहू केतु ने अमृत पाया
मंथन से विष भी आया
विषपान कर सृष्टि बचाने
हेतु
महाँकाल ने हाथ बढ़ाया
नीलकण्ठ महाँकाल कहलाता
सृष्टि को बचाकर
महाँकाल ने
देव धर्म
बाखुबी निभाया ।
आज वसुन्धरा
पे
प्रदुषण का
शेषनाग ने
मुँह फैलाया
कौन बनेगा
आज महाँकाल
सृष्टि को
कौन
बचायेगा
देव धर्म निभाकर
कौन कलयुगी
नीलकण्ठ
कहलायेगा

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव