तमाम तोहफे जुटाये थे उसकी खातिर
जब कभी मुन्तखिब होंगे
महबुब को दिल के हँसी टुकड़े रास आयेगे
कुछ रूमाल नेल पालिस बाड़ी लोशन महकते हुये खस
जाने क्या क्या जुटा रखा है दिले नादाँ
महबुबे मोहब्बत की इष्क मे लबरेज बातें
एक दुजे की बाहो मे गुजरी वो चाँदनी राते
तनहाईयो मे की थी जो मोहब्बत की बातें
गुलशन मे हुई वो तमाम रंगी मुलाकाते
वो रूखशार पे बोसो के निशा
मोहब्बत भरी कस्मे मेहबुब के वादे
वो तमाम खामोशीया गवा ए मोहब्बत ।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 29 August 2015
तमाम तोहफे जुटाए थे उसकी खातिर
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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