Thursday, 6 August 2015

महबुबे मोहब्बत

मेरे मेहबुबे मोहब्बत का मासुमियत से वो मुस्कुकराना।
कनखियो से देखकर महबुब का दाँतों तले उँगली दबाना।

महबुबे मोहब्बत की डगर मे पलके बिछाना ।
सामने उनके आने पर शर्माकर घर मे अंदर भाग जाना ।

बेखबर है महबुबे मोहब्बत ।
फकत जोशो खरोश है।
राजे दिल फकत जानते ही
गुम है खामोश है
महबुब मदहोश है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव