सखी माखन चोर की याद बहुत सतावत है
चहुओर चितचोर नंदकिशोर मुरलीमनोहर नजर आवत है
साँवरो सलोने नंदकुमार की याद सतावत है
उसके प्रेम मे जोगन हो ग ई तन मन की सुधार बुध बिसराई है
प्रेम विरह मे डुबी सखी जैसे जल मे गगरियाँ
विरहाग्नि मे यु तडपत है जैसे बिन जल मछुरिया
कैसे बताऊ कैसे बिछुडी जैसे कान्हा के लबो से बाँसुरिया
दुनिया कहती प्रेम दिवानी कोई न समझे विरह
साँवरा साँवरा साजन साँवरा रटते रटते हो ग ई बावरिया।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 30 August 2015
माखन चोर नंदकिशोर
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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