रिश्ते दिलों का बंधन है आसमाँ से बनके आते है
जमी पर इन्सान आसमाँ फकत आते है
हम मतलबी जमीनी इन्सान अपने मतलब से उसे
हिन्दू मुसलमान सिक्ख इसाई बनाते है
राखी के कच्चे धागों से बंधकर धरा पे मजबूती पाते है
सच्चा रिश्ता महबुब का होता है जो मरते दम तक निभाती है
मौत महबुबे मोहब्बत साथ लेकर जाती है
धरा की यारी मजबूत रिश्ता दोस्ती यारी कहलाती है
दोस्ती मे यार की खातिर जान की बाजी भी कम नजर आती है
No comments:
Post a Comment