Sunday, 30 August 2015

रिश्ते आसमाँ से बनके आते

रिश्ते दिलों का बंधन है आसमाँ से बनके आते है
जमी पर इन्सान आसमाँ फकत आते है
हम मतलबी जमीनी इन्सान अपने मतलब से उसे
हिन्दू मुसलमान सिक्ख इसाई बनाते है

राखी के कच्चे धागों से बंधकर धरा पे मजबूती पाते है
सच्चा रिश्ता महबुब का होता है जो मरते दम तक निभाती है
मौत महबुबे मोहब्बत साथ लेकर जाती है
धरा की यारी मजबूत रिश्ता दोस्ती यारी कहलाती है
दोस्ती मे यार की खातिर जान की बाजी भी कम नजर आती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव