बेकाबू होती
दिल की धडकनो को
थाम लो
बाहो के घेरे मे
घनेरे अंधेरे मे
जुलफो के शाये मे
ज्यों केश उलझते है
सुलझाने मे पसीना आता है
हम सुलझना नही चाहत हमारी
उलझने महबुब से अपुन की यारी
नही रोक सकती
कोई चार दिवारी
धडकते हुये दिलों की परवाज
मोहब्बत हमारी
दिलों की यारी
ज्यों परवाने की आरजु
शमाँ लगती
अपनी जान से प्यारी
जब से यारी
तेरी चाहत बनी
आरजु ए जिन्दगी
मेरे सनम मोहब्बत हमारी ।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 30 August 2015
बेकाबू दिल की धडकनो को
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