इस लिबाज मे दीदार करके
चेनो शुकून
दिल के गँवाया
ए कायनात के कारीगर
कयो
आखिर क्यों
तुझे रहम
न आया
क्या
उम्र
और कैसे
सितम
मुकद्दर के
कुदरत के बाजीगर
क्यों
आखिर क्यों
तुझे
रहम
न आया
इतनी मासूम
भोली भाली
सीधी साधी
कमसिन
को
क्यों
आखिर क्यों
मुकद्दर
ने
फकत
मुकद्दर
ने
क्यों
आखिर
क्यों
आपना शिकार बनाया
क्या
यही है
करम तेरा
तुझे
एक पल को
लहम
रहम
आखिर क्यों न आया।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 31 August 2015
इस लिबाज मे
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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