Monday, 31 August 2015

इस लिबाज मे

इस लिबाज मे दीदार करके
चेनो शुकून
दिल के गँवाया
ए कायनात के कारीगर
कयो
आखिर क्यों
तुझे रहम
न आया
क्या
उम्र
और कैसे
सितम
मुकद्दर के
कुदरत के बाजीगर
क्यों
आखिर क्यों
तुझे
रहम
न आया
इतनी मासूम
भोली भाली
सीधी साधी
कमसिन
को
क्यों
आखिर क्यों
मुकद्दर
ने
फकत
मुकद्दर
ने
क्यों
आखिर
क्यों
आपना शिकार बनाया
क्या
यही है
करम तेरा
तुझे
एक पल को
लहम
रहम
आखिर क्यों न आया।

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव