दिलों को तोड़ने का हुनर उनको आता है
नाजुक कली को फूल बनाकर भँवरा मुस्कराता है
एक कमसिन कली को मसलके परदेशी भँवर उड जाता है
लौटकर फिर कभी गुलशन मे नही आता है।
उपवन की चाँदनी सदा के लिये मुरझा जाती है
उसके चेहरे पर ताउम्र उदासी छा जाती है
गुलाबी रूखसार बेरौनक नजर आते है
जैसे रूठके बसंत मौसम के बीच लौट जाता है
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