Thursday, 6 August 2015

मेरी कृति

विरही
की
वेदना
ख्याल
बनके मनकी रचना
आज कृतक समक्ष
आई
कृतक प्रिया ने कैसी धूम मचाई है
जनन्ते हुर के आते ही
फिजा मे रौनक आई
आज नही कोई विवश
सभी की इच्छा से बन आई है
ना ना रूप धर के रूपसी
विवश नजर नही आई
मेरी
प्रियतम
मेरी कृति
कृतक हर्दयानुभूति
रचना
सज सँवर कर सामने आई
मर्यादित
अति
शोभित
रचना
सबके दिलों पे छाई
कृतक की अपनी
है रचना
नही अब पराई है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव