विरही
की
वेदना
ख्याल
बनके मनकी रचना
आज कृतक समक्ष
आई
कृतक प्रिया ने कैसी धूम मचाई है
जनन्ते हुर के आते ही
फिजा मे रौनक आई
आज नही कोई विवश
सभी की इच्छा से बन आई है
ना ना रूप धर के रूपसी
विवश नजर नही आई
मेरी
प्रियतम
मेरी कृति
कृतक हर्दयानुभूति
रचना
सज सँवर कर सामने आई
मर्यादित
अति
शोभित
रचना
सबके दिलों पे छाई
कृतक की अपनी
है रचना
नही अब पराई है
https://m.facebook.com/amritsagarownsms
No comments:
Post a Comment