संध्या की हुई
बिदाई
चाँद ने ली अंगडाई
चाँद के नूर से कायनात हुई रौशन
अंधियारे ने दीवार की ओट पाई
मौसमे मोहब्बत
इष्क मेहरबान
चारों और सननाटे का मंजर
वादिये काश्मीर की जन्नत सी रौनक
आइना ए डलझील मे चाँदनी का यौवन
निखर के आया
महबुबे मोहब्बत को मोहब्बत मे शामिल पाके चाँद भी शर्माया
शालिमार उपवन भी आज मुस्कराते हुये शर्माया
मोहब्बत मे मशगुल महबुबे मोहब्बत के माथे पसीना आया
ये नजारा देख चाँद मुस्कराया ।
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