मेरे महबुबे मोहब्बत के लिये दिल आज रोता है
कैसे महबुब को बताऊ ये जिस्म किराए का घर होता है
महबुबे मोहब्बत मे रंगीन खाबो का महल था हमने
अपनी ख्वाबगाह को खूब सलीके से था सजाया
महबुबे मोहब्बत मे हमने था खुद को भी भुलाया
शिकवा है रब से हमारी ये दिन ही दिखाना था तो क्यों हमको मिलाया
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 1 September 2015
मेरे महबुबे मोहब्बत 2
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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