बाद मुद्दत के यकबयक
सरेशाम हुई मुलाकात मेरे महबुब
यु लगा जैसे जन्नत को सरेआम पाया हमने
फिर एक दिन
जब हमको उसने बताया
हमारे दिल मे आज तलक
तेरी मोहब्बत की आरजु जवाँ
लब खामोश फकत नजरें बयाँ करतीं
हाले दिल
मोहब्बत का इझहार फकत नजरो से
यु लगा कि आँखों से बिदाई पाई उसने
चिलमन की ओट से महबुब का दीदार
नजरें डगर तकती मेरे महबुब
मेहबुबे मोहब्बत की दिलकश मुलाकात
झुकी नजरों से मोहब्बत का इझहार किया
खामोश लबो से नजरों ने महबुबे मोहब्बत को हमदम दिल ने स्वीकार किया।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 1 September 2015
यकबयक
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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