Tuesday, 1 September 2015

यकबयक

बाद मुद्दत के यकबयक
सरेशाम हुई मुलाकात मेरे महबुब
यु लगा जैसे जन्नत को सरेआम पाया हमने
फिर एक दिन
जब हमको उसने बताया
हमारे दिल मे आज तलक
तेरी मोहब्बत की आरजु जवाँ
लब खामोश फकत नजरें बयाँ करतीं
हाले दिल
मोहब्बत का इझहार फकत नजरो से
यु लगा कि आँखों से बिदाई पाई उसने
चिलमन की ओट से महबुब का दीदार
नजरें डगर तकती मेरे महबुब
मेहबुबे मोहब्बत की दिलकश मुलाकात
झुकी नजरों से मोहब्बत का इझहार किया
खामोश लबो से नजरों ने महबुबे मोहब्बत को हमदम दिल ने स्वीकार किया।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव