उँचे घनेरे दरख्तो के घमासान बियाबान जंगल मे
भाग दौड़ भरी परिस्थितियों मे
लम्हा लम्हा गुजर रही है जिन्दगी मेरे महबुब
महबुबे मोहब्बत के दीदार से शुकून दिल को आया
कमसिन मासूम जन्नते हूर की झलक जैसे जेठ की तापती धूप मे सावन की बदरिया बरसी
दिल ही दिल मे नूरे नजर को आगोस मे लेके
सावन की बदरिया ने घमासान मचाया मेरे मैखाने के चौबारे
दिल को तसल्ली मिली मिला चौनो शुकून अपार
जन्नते हूर के बिखरे गेसू
जैसे देवराज की चतुरंगिणी सेना आ पहुँची मेरे द्वार
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 1 September 2015
घोर घने जंगल मे
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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