सखी माखन चोर की याद बहुत सतावत है
चहुओर चितचोर नंदकिशोर मुरलीमनोहर नजर आवत है
साँवरो सलोने नंदकुमार की याद सतावत है
उसके प्रेम मे जोगन हो ग ई तन मन की सुधार बुध बिसराई है
प्रेम विरह मे डुबी सखी जैसे जल मे गगरियाँ
विरहाग्नि मे यु तडपत है जैसे बिन जल मछुरिया
कैसे बताऊ कैसे बिछुडी जैसे कान्हा के लबो से बाँसुरिया
दुनिया कहती प्रेम दिवानी कोई न समझे विरह
साँवरा साँवरा साजन साँवरा रटते रटते हो ग ई बावरिया।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 1 September 2015
माखन चोर नजर आवत है सखी टहु ओर
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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