Tuesday, 1 September 2015

माखन चोर नजर आवत है सखी टहु ओर

सखी माखन चोर की याद बहुत सतावत है
चहुओर चितचोर नंदकिशोर मुरलीमनोहर  नजर आवत है
साँवरो सलोने नंदकुमार की याद सतावत है
उसके प्रेम मे जोगन हो ग ई तन मन की सुधार बुध बिसराई है
प्रेम विरह मे डुबी सखी जैसे जल मे गगरियाँ
विरहाग्नि मे यु तडपत है जैसे बिन जल मछुरिया
कैसे बताऊ कैसे बिछुडी जैसे कान्हा के लबो से बाँसुरिया
दुनिया कहती प्रेम दिवानी कोई न समझे विरह
साँवरा साँवरा साजन साँवरा रटते रटते हो ग ई बावरिया।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव