Wednesday, 2 September 2015

Amrit sagar

मित्रों आप अमृत सागर ज्वाइन करे मेरी और मित्रों की अद्वितीय काव्य रचनाओं का आनंद
लीजिये।

जर्रे जर्रे मे बसा सुदर्शन चक्रधारी है
मेरे जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी है

श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे गुजरी उम्र सारी है
कृतक इस जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी कृष्ण मुरारी है

श्री राधिका रूह जिस्म बान्केबिहारी है
श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे समर्पित उम्र सारी है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव