सरेशाम ख्वाबगाह मे महबुबे मोहब्बत को देखकर
ठिठक कर एकटक देखा
कुछ भी तो नही कहा मैंने
बाद मुद्दत के दीदारे यार किया
झुकी हुई नजरों को नजर भरके मेरी नजरों से देखा
दिल आन्दोलित नजर आया
दिल ने बाहो मे भरके महबुबे मोहब्बत
जी भरके बरसों की पिपासा शान्त करूँ
झुकी हुई नजरें धरती खोदती
फकत मौन समर्पण
अश्को का सैलाभ जो देख
जुनून को ठन्डक कुछ हद आई
परवरदिगार को बाद मुद्दत के रहम आज आया
तनहाईयो मे धडकते हुये दिलों की घडकन
बेकाबू दिलों की तडप और कसक
फिजा की खामोशियो को तोड़ने को बेकरार
या रब शुकू महबुबे मोहब्बत के दिल को
और जुनून फकत आशिक के दिल को बक्स
उसको गमो से राहत दे
खुशियों से झोली भरदे मेरे महबुब की
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 2 September 2015
सरेशाम ख्वाबगाह मे महबुबे मोहब्बत को देखके
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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