Wednesday, 2 September 2015

सरेशाम ख्वाबगाह मे महबुबे मोहब्बत को देखके

सरेशाम ख्वाबगाह मे महबुबे मोहब्बत को देखकर
ठिठक कर एकटक देखा
कुछ भी तो नही कहा मैंने
बाद मुद्दत के दीदारे यार किया
झुकी हुई नजरों को नजर भरके मेरी नजरों से देखा
दिल आन्दोलित नजर आया
दिल ने बाहो मे भरके महबुबे मोहब्बत
जी भरके बरसों की पिपासा शान्त करूँ
झुकी हुई नजरें धरती खोदती
फकत मौन समर्पण
अश्को का सैलाभ जो देख
जुनून को ठन्डक कुछ हद आई
परवरदिगार को बाद मुद्दत के रहम आज आया
तनहाईयो मे धडकते हुये दिलों की घडकन
बेकाबू दिलों की तडप और कसक
फिजा की खामोशियो को तोड़ने को बेकरार
या रब शुकू महबुबे मोहब्बत के दिल को
और जुनून फकत आशिक के दिल को बक्स
उसको गमो से राहत दे
खुशियों से झोली भरदे मेरे महबुब की

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव