Wednesday, 2 September 2015

हम भी

हा यार हम भी बार्डर पे युही वर्षों से
सुनी कलाई
खामोश नजर
खामोश जिगर
मदहोश नजर
गगनचुम्भी अटटालिकाओ से फकत यारी
वही मा वही बहन
जीने की आरजु हमारी
जिन्दगी ने उनसे करली यारी
हरेक राखी से ज्यादा
भारत माता प्यारी
मा बहन सभी कुछ है हमारी
वतन के लिये छोड़े सब कुछ
वतन ही सच्ची महबुबे मोहब्बत
हमारी ।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव