Thursday, 3 September 2015

तेरा मेरा मिलन

तेरा मेरा मिलन
एक बंधन
अंजाना
अंजाम का है कोई ठिकाना
मिलन
महबुब और आंशिक
मोहब्बत फकत जरूरत
आजादी
चोरी
आरजु
जरूरी
गुलामी
पहचान
अजनबी
मेहमान
जिन्दगी
हुई
हैरान
भारतियता
फकत
बन ग ई मेरी पहचान
मोहब्बत
सात फेरी
अग्नि साक्षी
छिन ग ई
मेरी मुस्कान
हैरान
परेशान
मोहब्बत से
आज भी है
मेरी मुस्कान

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव