Tuesday, 1 September 2015

कभी न मोहब्बत करियो मेरे यार

कभी न करियो मोहब्बत
बुजुर्गो ने ये फर्माया
ये दरिया ए आग है
इसने आशिको को जलाया है

अंजामे मोहब्बत शब सामने आया
परवाने ने खुद को शमा मे पाया है

मोहब्बत कोई खेल नही
दो दिलों का फकत मेल प्यारे
जिसने की वो मजनु बनके रोया चिल्लाया
जिसने ना कि वो भी राझणा को देख पछताया है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव