Wednesday, 2 September 2015

संध्या की बिदाई

संध्या की हुई बिदाई
चाँद ने ली अंगडाई
चाँद के नूर से कायनात हुई रौशन
अंधियारे ने दीवार की ओट पाई
मौसमे मोहब्बत
इष्क मेहरबान
चारों और सननाटे का मंजर
वादिये काश्मीर की जन्नत सी रौनक
आइना ए डलझील मे चाँदनी का यौवन
निखर के आया
महबुबे मोहब्बत को मोहब्बत मे शामिल पाके चाँद भी शर्माया
शालिमार उपवन भी आज मुस्कराते हुये शर्माया
मोहब्बत मे मशगुल महबुबे मोहब्बत के माथे पसीना आया
ये नजारा देख चाँद मुस्कराया ।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव