संध्या की हुई बिदाई
चाँद ने ली अंगडाई
चाँद के नूर से कायनात हुई रौशन
अंधियारे ने दीवार की ओट पाई
मौसमे मोहब्बत
इष्क मेहरबान
चारों और सननाटे का मंजर
वादिये काश्मीर की जन्नत सी रौनक
आइना ए डलझील मे चाँदनी का यौवन
निखर के आया
महबुबे मोहब्बत को मोहब्बत मे शामिल पाके चाँद भी शर्माया
शालिमार उपवन भी आज मुस्कराते हुये शर्माया
मोहब्बत मे मशगुल महबुबे मोहब्बत के माथे पसीना आया
ये नजारा देख चाँद मुस्कराया ।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 2 September 2015
संध्या की बिदाई
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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