Tuesday, 10 November 2015

फेस बुक मोहब्बत

क्या फेस बुक की मोहब्बत दिल का अरमान होती है
क्या फेस बुक मे कहे गये आय लव यु मे जान होती है
तुम ही कुछ कहो चाँदनी हम तो कुछ सोच भी नही पा रहे
क्या फेस बुक की मोहब्बत वाकई दिनो इमान होती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव