Tuesday, 10 November 2015

आखिर क्यो

मोहब्बत की सरहद नही होती
दिल देने की कोइ वजह नही होती
क्यो दिलो के जजबात दबाने पडते है
क्यो दिल को ढाढस बंधाना पडता है
क्यो हरेक दिल को प्यार महसूस नही
क्यो सभी को मोहब्बत भाती नही है
क्यो सभी को मोहब्बत रास आती नही है
क्यो दिल ही दिल मे दिल मिलता नही
क्यो जजबात मे मोहब्बत का कमल खिलता नही
क्यो महबूब मिलने पे कभी कभी दिल मचलता नही
क्यो हरेक दिल मे मोहब्बत का कमल खिलता नही
क्यो हरेक दिल मोहब्बत के नग्मे गाता नही
क्यो हरेक गुल फिजा महकाता नही
क्यो मोहब्बत करना सजा यार होती है
क्यो महबूबे मोहब्बत ही आठ आठ आंसू रोती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव