Tuesday, 10 November 2015

मेरे महबूब की मोहब्बत रंग लाई है

मेरे महबूब मोहब्बत रंग लाई है
चाँदनी महबूब बनके छाई है
सारी फिजा रौशन है
रब दी कायनात मुसकुराई है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव