ना जाने क्यो लोग मोहब्बत को खेल समझते
दो दिलो के पावन मेल को तिहाड जेल समझते है
अब लोग यहां मोहब्बत नही करते है
फकत दिखावे के लिये मोहब्बत का स्वांग रचते है
ना जाने क्यो लोग मोहब्बत का दम भरते है
हुस्न की चाहत मे आह भरने का स्वांग करते है
जाने क्यो लोग महज दिखावे के लिये मोहब्बत यार करते है
दिल को खिलौना समझकर खेलते है
दिल भर जाने पर नये खिलौनो की तलाश करते है
महबूबे मोहब्बत के दिल से खेलते है मोहब्बत का दम भरते
ना जाने क्यो लोग मोहब्बत यार किया करते है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 10 November 2015
ना जाने क्यो
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