Wednesday, 4 November 2015

बीती शब

कल रात मेरी महबूब चाँदनी का पैगाम आया
हुस्न यार ने नजाकत से ख्वाबगाह मे बुलवाया

चाँदनी का पैगामे मोहब्बत दिल को रास आया
हमने मेहबूब के पैगामे विजिट ख्वाबगाह कुबूल फर्माया

ख्वाबगाह मे शबनमी हुस्न का दीदार किया मैने
बाहो मे भरकर मेरे महबूब से सारी रात प्यार किया मैने

जनन्ते हूर चाँदनी से जनन्त का सा शुकून पाया मैने
मोहब्बत महबूब को दिल से कई कई बार लगाया मैने

दीदारे यार से अपार शुकून दिल को मेरे यारो आया
मेरे महबूब के गुलाबी रूखसार ने दिल यकीनन चुराया

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव