कल रात मेरी महबूब चाँदनी का पैगाम आया
हुस्न यार ने नजाकत से ख्वाबगाह मे बुलवाया
चाँदनी का पैगामे मोहब्बत दिल को रास आया
हमने मेहबूब के पैगामे विजिट ख्वाबगाह कुबूल फर्माया
ख्वाबगाह मे शबनमी हुस्न का दीदार किया मैने
बाहो मे भरकर मेरे महबूब से सारी रात प्यार किया मैने
जनन्ते हूर चाँदनी से जनन्त का सा शुकून पाया मैने
मोहब्बत महबूब को दिल से कई कई बार लगाया मैने
दीदारे यार से अपार शुकून दिल को मेरे यारो आया
मेरे महबूब के गुलाबी रूखसार ने दिल यकीनन चुराया
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