चाँदनी की महक से शुकून दिल को यार आता है
चाँदनी का जलवा दिल को मेरे शरेसाम चुराता है
चाँदनी को इस दिल का निगेबा बना लिया हमने
सारे जहां से बावस्ता मलिका ए दिल बना लिया हमने
बेपनाह मोहब्बत चाँदनी से मेरे यार करते है
आइना ए दिल मे मेरे महबूब का हर घडी दीदार करते है
इस जमाने की तंगदिली से वाकिफ है यार हम
इस बावद छुपछुप के मेरे महबूब से प्यार करते है
सोलह सिन्गार करके पूनम को चाँदनी आती है
सारे जमाने की नजरे चकाचौघे हुस्ने दीदार से बन्द हो जाती है
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