Sunday, 8 November 2015

चाँदनी की रचना

पृियतम चाँदनी आपकी रचनाये
बेहद लाजवाब यार होती है
जैसे सीप मे छुपा मोती है
जैसे दीपक मे समाहित ज्योति है
जैसे अमृत सागर का दिव्य पानी है
कुदरत की मोहब्बते शुमार है
आपकी रचनाये सागर की धार है
सच मानिये नव वधु का सोलह सिन्गार है
सावन की घटाओ की रिमझिम है
जेठ की मूसलाधार है
मोहब्बते महबूब के दिल की धडकन
कृतक मनोहर यादव का प्यार है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव