Sunday, 8 November 2015

चाँदनी के सीने मे धडकता है दिल हमारा

चाँदनी के सीने मे धडकता है दिल हमारा
कहने को जिस्म महबूब का मन है हमारा
एक दूजे के बिना एक भी जीना नही गवारा
मेरा महबूब हमको अपनी जान से है प्यारा

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव