हमने आजाद फिजाओ मे जन्म सनम मेरे सनम पाया है
शैफाली की मादक महक से महकती फिजाओ को जेहन बसाया है
महबुबे मोहब्बत ने गुलामी के से माहौल मे जिन्द बिताई है
कायनात के आपरेटर को मेरे महबुब पे दया आई है
जिन्दगी उसी रब के रहमो करम पे है फकत उसी की खुदाई है
सावन के सुहाने मौसम मे बरखा ने परिन्दो की नींद उडाई है
इन्द्र की सेना कहर बरपाती सितमगर नजर आई है
महबुबे मोहब्बत की आशिकी मिलन के हँसी लमहे सौगात मयी नजर आई है
चाँदनी ने मेरे चौबारे अमृत वृष्टी कर जिन्दगी मे बहारे लौटाई है।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 13 December 2015
आजाद फिजा
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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