महबूब को खुशी देकर यारो मै सदा मुस्कराता हू
मै उपवन का पुष्प शाख से टूटने का गम भुलाता हू
मानव की जिन्दगी मे हरेक अवसर पे काम आता हँ
देवो के सर पे चढके अपने भाग्य पे इतराता है
जन्नत के मुसाफिरो की अर्थियो की शोभा बढ़ाता है
मानव की करूणाई के वक्त मुस्कराते हुये सहलाता हू
सभी धर्मों के लोगों के काम आता हूँ
अमीर गरीब सभी के द्वारा सराहा जाता हू
मै फूल हू उपवन का सभी के काम आता हू
रति के गुजरे मे सजाकर चार चाँद उसके सौन्दर्य मे लगाता हू
सुहाग की सेज पे सजके दुलारा जाता हू
मूक गवाह कली को फूल बनते देख मुस्कराता हूँ
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 13 December 2015
पुष्प की कुर्बानी अपनी कहानी अपनी जुबानी
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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