मोहब्बत का रिश्ता बडे मुकददर से नसीब होता है
बहुत खुशनसीब है वो जो महबूब के करीब होता है
महबूब का दिल आशिक की रूह दो जिस्म एक जान होते है
ये प्यार के पागल परवाने जमाने की रूसवाइयो से अंजान होते है
वक्त की वफाये भी बडी नादान होती है
प्यार मे पागल परवानो की दीवानगी से अंजान होती है
खिजा.के फूल भी महबूब की मोहब्बत से वाकिफ यार होते है
महकती हुई मोहब्बत लरजती हुई महक के पसेमान होते है
रब की रहमत भी महबूबे मोहब्बत की निगेबां होती है
जमाने की रूसवाइयो के दर्मिया मोहब्बत जवाँ होती है
रब की अजीमो करीम रहमत से महबूब की मोहब्बत पाई है
मोहब्बत की महक से सहराओ की फिजा मे रंगत छाई है
हमने अपना आशियाना महबूब का दिल बनाया है
पाक परवरदिगार को हमारी मोहब्बत की पाकीजगी पे यकीं आया है
बाद मुद्दत के सहराओ से मोहब्बत की बयार आई है
चाँदनी ने शबनमी मोतियो से वसुन्धरा आज सजाई है
महबूबे मोहब्बत की यादे शाया बनकर साथ रहतीं है
लब बंद जुबाँ खामोश नजरे दिल से दिल की बात कहती है
महबूबे मोहब्बत की हँसी यादो का शाया साथ रहता है
प्यार भरा दिल मेरे महबूब की यादो मे धडकता रहता है
महबूब की रूह रोज साँझ ढले मेरी ख्वाबगाह आती है
तनहाईयो के आलम मे मोहब्बत से सराबोर कर जाती है
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