जब अपने सर को झुकाया मैने
अपने गुरूर को मिट्टी मे मिलाया मैने
जब अपनी नजरो को झुकाया मैने
तेरी हरेक ख्वाहिश को दिल मे बसाया मैने
जब तेरी चरण रज को मांग का सिंदूर बनाया मैने
अपना रब समझ दिल मे सनम बसाया मैने
जब दिल ही मे अपना चाँद समझ अपनाया मैने
मेरे महबूब दिल जानो जिगर सब कुछ लुटाया मैने
जब दोनो हाथो को उपर उठाया मैने
तेरे सदके सबकुछ अपना लुटाया मैने
लबो पे महबूबे मोहब्बत को बसाया मैने
अपना सर्वस्य तुझमे ही मेरे सनम पाया मैने
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 15 December 2015
जब अपने सर को
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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