Tuesday, 15 December 2015

गद्दारे वतन

असहिष्णुता असहनशीलता के माइनो से वाकिफ है यार हम वाकिफ हो यार तुम
और वाकिफ है यार हिन्द वाकिफ है जहाँ
जिसे मेरे वतन से मोहब्बत नही
जो महसूस करता है ऐसा
खुशी खुशी छोड दे मादरे वतन वो काफिर
छोड दे मेरा जनन्त सा प्यारा हिन्दोस्ता
चुन ले वो अपना वतन
बहुत विशाल है जहां
उठाले अपना कारवाँ
बनाले अपना चमन
दुखता है दिल गद्दारे चमन की हरकतो से
मेरा वतन मेरा प्यारा वतन

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव