असहिष्णुता असहनशीलता के माइनो से वाकिफ है यार हम वाकिफ हो यार तुम
और वाकिफ है यार हिन्द वाकिफ है जहाँ
जिसे मेरे वतन से मोहब्बत नही
जो महसूस करता है ऐसा
खुशी खुशी छोड दे मादरे वतन वो काफिर
छोड दे मेरा जनन्त सा प्यारा हिन्दोस्ता
चुन ले वो अपना वतन
बहुत विशाल है जहां
उठाले अपना कारवाँ
बनाले अपना चमन
दुखता है दिल गद्दारे चमन की हरकतो से
मेरा वतन मेरा प्यारा वतन
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 15 December 2015
गद्दारे वतन
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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