गिला भी तुमसे करेगें
शिकवा भी तुम्हीं से करेंगें
शिकायत भी तुम्हीं से करेंगें
मोहब्बत भी तुम्हीं से करेंगें
तुम्हारी चाहत में जियेंगें ए जिन्दगी
तुम्हारी चाहत में ही मरेंगे चाँदनी
पूनम की चाँदनी में शबनमी मोतियों का नूर दिल को भाता है
तुम्हारी मोहब्बत में जाँ की बाजी परवाना लगाता है
दिलों की दूरियों के दर्मिया कांगृेस घास की सी बढती है मोहब्बत
कभी कभी दिलों के फासलें कम होने पर सिकुडती है मोहब्बत
दुरियों के बढने के साथ साथ बढती है मोहब्बत मेरे यार
खामोशियाँ दिलों के दर्मिया दूरियों बढने का सबब फकत यार होती है
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