Friday, 25 March 2016

पूनम की रात चाँदनी ने गजब ढाया है

पूनम की रात चाँदनी ने गजब ढाया है
मेरे महबूब हुस्ने यार ने समाँ बँधाया है
रूखे रौशन गुलजार हरेक डगर है आज
चाँदनी रात शेफाली ने फिजा महकाई है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव