बहुत शुकृिया तुम्हारा
चार पल का साथ मिला
कल्पना लोक मे सुखद अहसास मिला
लफ्जों को परवाज मिली
सुर्ख रूखसार का नूर मिला
यदी हो कोई शिकवा या गिला
अपना समझ भुला देना मितवा
एक वो न मिला
जिसका सदियो से इन्तजार
एसा नही
रूह को जिस्म का अहसास मिला
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
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